कोई भी मजहब आतंक की तालीम नही देता । कोई भी धमॆ रक्त बहाने को बढ़ावा देने की वकालत नही करता । खासकर आतंकी घटनाएं तो किसी को तवक्को नही है । चाहे हिन्दु हो या मुसलमान,सिख या ईसाइयत...या फिर बोद्ध ...कुरानशरीफ तक ने सभी मानवों को साथ रहने और जीने की तालीम देता है उसी राह पर सभी धमॆ आपसी भाईचारे और नेकनीयती की सीख देता है । इसलिए बार-बार यह सवाल कुरेदता रहता है कि आतंकवादियो का कोई मजहब नही होता । उनका मजहब केवल इंसा का खून बहाना होता है॥मनुष्य को कष्ट पहुंचाना होता है उसी में उसे आनंद आता है ।
लेकिन इसके विपरित एक सवाल बार-बार जेहन में आता है कि आतंक का कोई मजहब नही होता है फिर आतंकी किसी मजहब का नाम अपने साथ क्यो जोड़ते है । अपने खुदा या अल्लाहताला का नाम क्यो लेते है खुदा ने उसे दहशत फैलाने और जेहाद के लिए धरती पर भेजा है या उसकी तरफ से पैगाम मिला है।
इसके बाबजूद कोई भी धमॆ आतंक और हिंसा से अधूरा नही है ...यहां तक कि बौदध धमॆ भी नही जिसकी बुनियाद अहिंसा पर हुई है । इस्लाम का इतिहास ही अहिंसा पर टिका है । शाहजहां से लेकर औरंगजेब तक शासन के लिये अपने पिता को बंधक बनाना और जेल में कैद रखना ...सारा का सारा इतिहास पटा हुआ है । तैमूर से लेकर गजनबी तक का इतिहास अहिसा की बुनियाद पर लिखी गई है फिर आतंक का किसी मजहब के साथ नही होने से कैसे इन्कार किया जा सकता है ।
हिन्दुओ का इतिहास भी इससे अधूरा नही है । बिम्बिसार से लेकर अशोक तक का इतिहास खून से लिखा गया है । अशोक ने बोद्दद धमॆ अपनाने से पहले लाखो लोगो की हत्या करवा चुका था और अपने ९९ भाइयो को कत्ल कर शासक बना् था । बहुत सारे उदाहरण इतिहास के पन्नोँ में लिखित है । अहिंसा की बुनियाद पर टिका बोद्ध धमॆ भी द्वितीय विश्वयुध्द में किसी से पीछे नही रहा । सारे धमॆ के लोग किसी न किसी तरह हिंसा-प्रतिहिंसा से जुड़े दिखते है फिर कैसे इन्कार किया जा सकता कि कोई मजहब आतंक की तालीम नही देता ।
यूं कहे कि धमॆ की बुनियाद ही हिंसा पर टिकी है या तैयार हुई है । सभी धमॆ के लोगो ने इंसान का खून बहाया है और इसी के बलबूते अपने को स्थापित किया है ।
लेकिन मजहब ऐसा नही कहता । बेसहारा जनता ऐसा नही सोचती । मुम्बई ,दिल्ली और जयपुर के लोग ऐसा नही सोचते । फिर यह सोचने को मजबूर होना पड़ता है कि आखिर जेहाद क्या है । इंसान इंसान का खून क्यो गिराता है । जब कि कोई मजहब या पैगम्बर ऐसा नही कहता । फिर मुम्बई में ताज होटल में लोगो का खून क्यो बहा । आखिर जेहाद की कुछ तो परिभाषा होनी ही चाहिए ।
जय श्रीराम
12 years ago